जय श्री सोखा शंभू नाथ

सिय राम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ॥

or

काम क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ। सब परिहरि रघुबीरहि, भजहुँ भजहिं जेहि संत।

हाल ही किए गए कार्यक्रम

श्री सोखा शंभू नाथ हिंदू धर्मार्थ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा महा शिवरात्रि (26/02/2025) के अवसर पर भजन संध्या: कीर्तन का आयोजन

धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और समाज सेवा में समर्पित एक प्रतिष्ठित ट्रस्ट, जो मानवता और आध्यात्मिकता को बढ़ावा देता है। श्री सोखा शंभू नाथ...

श्री सोखाशंभु नाथ हिंदू धर्मार्थ चैरिटेबल ट्रस्ट: सेवा और समर्पण का प्रतीक

श्री सोखाशंभु नाथ हिंदू धर्मार्थ चैरिटेबल ट्रस्ट धार्मिक और सामाजिक कल्याण के प्रति समर्पित एक प्रतिष्ठित संस्था है। यह ट्रस्ट न केवल आध्यात्मिकता को...

राम चरित मानस पाठ प्रतियोगिता आवेदन फ़ॉर्म

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आइए जानें श्रीहरि के दशावतारों के बारे में..

हिंदु धार्मिक ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार, धरती पर बढ़ते पापों को खत्म करने के लिए भगवान खुद संसार में अवतार के रूप में...

अच्छी सीख देता है शूर्पणखा और रावण का ये प्रसंग

अच्छी सीख क‍िसी के भी द्वारा दी जाए , उसे ग्रहण कर ही लेना चाह‍िए, बुराइयों से बचने की सीख देने वाला ये प्रसंग...

अयोध्‍या के राम मंदिर की मियाद होगी एक हजार साल

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 23 मई तक तक मंदिर के विभिन्न चरणों की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव...

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जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि। बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि॥

जगत में जितने जड़ और चेतन जीव हैं, सबको राममय जानकर मैं उन सबके चरणकमलों की सदा दोनों हाथ जोड़कर वन्दना करता हूँ॥

1. हमारा उद्देश्य

भारतीय संस्कृति और नागरिक समाज के मूल्यों को बनाए रखने के आदर्शों को बढ़ावा देता है और बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को “मजबूत” करने के लिए हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करता है l

2.मानव सेवा

सेवा मानव को मानव से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। सेवा करना तप समान है। सेवा करने वाले के हृदय में प्रेम, करुणा, उदारता, परोपकार और सहनशीलता का होना आवश्यक है।

3. उत्तम संस्कृति

उत्तम संस्कृति का अनुसरण अपने पूर्ण पुरुषार्थ द्वारा शारीरिक एवं चारित्रिक बल को अर्जित कर मानवमात्र की सेवा में लगा देना ही उद्देय है।

जा पर कृपा राम की होई।
ता पर कृपा करहिं सब कोई॥

जिन पर राम की कृपा होती है, उन्हें कोई सांसारिक दुःख छू तक नहीं सकता और उस पर तो सभी की कृपा अपने आप होने लगती है।